मनचला दिल

उम्मीद का चिराग लेकर
मनचला दिल आज अपने लिए सुकून को ढूंढने निकला था…
परेशानियों की आंधी ने
उस चिराग को बुझाना चाहा था..!!!

कठिनाइयां गुलमोहर की फूलों की भाँति
उसके राहों में बिखरे पड़ीं थीं….
फर्क इतना था
वो फूलों की तरह मुलायम नहीं थीं…..!!!

गुज़र रही थी रुत भी अपनी ही रफ़्तार से …
और ये इक मनचला दिल था
जो अपनी मनमानी किये बैठा था ….
उसे रास्ते का पता न था
सुकून का मंज़िल ढूंढने निकला था …..!!!

वो गमगिनियों के कोहरे को खुशियों की
जगमगाती किरणों से मिलन कराने निकला था ….!!!
खुद के लिए ही सही पर इक नयी राह परखने निकला था ..!!
धधकते हुए मन पर कुछ सुकून के ठंडेपन के छीटें डालने निकला था ..!!!

उम्मीद का चिराग लेकर
मनचला दिल आज अपने लिए सुकून को ढूंढने निकला था …!!

12 Comments

    • Ankita Anshu 28/06/2016
  1. sarvajit singh 28/06/2016
    • Ankita Anshu 28/06/2016
  2. निवातियाँ डी. के. 28/06/2016
    • Ankita Anshu 28/06/2016
  3. babucm 28/06/2016
    • Ankita Anshu 28/06/2016
  4. mani 28/06/2016
    • Ankita Anshu 28/06/2016
  5. Shishir "Madhukar" 28/06/2016
    • Ankita Anshu 28/06/2016

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