दर्द बढ़ कर दवा हो गया…सी.एम. शर्मा (बब्बू) ….

दर्द बढ़ कर के दवा हो गया…
जब से तू हमसे खफा हो गया…

तेरी यादों ने भी साथ हमारा छोड़ दिया….
तन्हाई का सफर भी तन्हा हो गया….

किस कदर हुस्न बेपर्दा हो गया…
रूबरू इश्क़ के होश हवा हो गया…

इलज़ाम-ऐ-बेवफाई हम पर जवां हो गया…
तुमने नज़रें फेरी…मैं अपना दुश्मन हो गया…

खुशगवार मौसम अब हर तरफ हो गया…
तुम्हारे देखते ही बीमार अच्छा हो गया…

जा रहा था रकीब बुदबुदाता सा कल शाम…
देखते ही मुझको वो और ग़मज़दा हो गया….

हवाएं तो तेज़ चली हैं अब की बार “बब्बू”…
पैरहन वजूद सब तार तार हो गया…
\
/सी.एम. शर्मा (बब्बू)

पैरहन = लबादा/कपडे
वजूद = पहचान (existence)

18 Comments

    • babucm 27/06/2016
  1. babucm 27/06/2016
  2. mani 27/06/2016
    • babucm 28/06/2016
  3. Shishir "Madhukar" 27/06/2016
    • babucm 28/06/2016
  4. अरुण कुमार तिवारी 27/06/2016
    • babucm 28/06/2016
  5. अकिंत कुमार तिवारी 27/06/2016
    • babucm 28/06/2016
  6. निवातियाँ डी. के. 27/06/2016
    • babucm 28/06/2016
  7. sarvajit singh 27/06/2016
    • babucm 28/06/2016
  8. Dr Swati Gupta 27/06/2016
    • babucm 28/06/2016

Leave a Reply