डोर – मेरी शायरी……. बस तेरे लिए

डोर

ज़माने ने तो बहुत कोशिश की
हम दोनों को ज़ुदा करने की ……………………………….
पर ना जाने वो कौन सी डोर थी हमारी मोहब्बत की
जो हर पल ओर भी मजबूत होती चली गई ………………………

शायर : सर्वजीत सिंह
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12 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 26/06/2016
    • sarvajit singh 27/06/2016
  2. निवातियाँ डी. के. 26/06/2016
    • sarvajit singh 27/06/2016
  3. अरुण कुमार तिवारी 26/06/2016
    • sarvajit singh 27/06/2016
  4. babucm 27/06/2016
    • sarvajit singh 27/06/2016
    • sarvajit singh 27/06/2016
  5. mani 27/06/2016
  6. sarvajit singh 27/06/2016

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