किस्मत

उम्र भर अपनों के आँसू पोंछते रह गए हम
खुद आँसू बहाने का वक़्त भी नसीब हुआ नही।

औरों को रोता देखकर रोने की कोशिश बहुत की
फिर उनको हंसाने का ख़याल मन मे आ गया ।

अपने काफिले मे इतने कांटे सजा लिए मैंने
कोई अब साथ चलने को तैयार नहीं होता।

दिल के हाथों मजबूर हूँ,किस्मत नही बदल सकता
चाहे कितने ही सितारे मेरी मुट्ठी मे आ जाए।

सबक सीखा है तूफानों के रुख बदलने का
पर खुद को बिखरने से बचा नहीं पाता हूँ मै।

मौत से सामना तो हर रोज होता है मेरा
मगर जिंदगी से नजरें चुरा नही पाता हूँ मैं।

…देवेंद्र प्रताप वर्मा”विनीत”

3 Comments

  1. निवातियाँ डी. के. 26/06/2016
  2. Shishir "Madhukar" 26/06/2016
  3. babucm 27/06/2016

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