शायरी : ‘जुनून-ए-इश्क’

ये तड़प भी बड़ी अजीब होती है,
पर क्या करुँ ? दिल को’अजीज’
होती है,
छुप-छुप के मोहब्बत करने की जरूरत नहीं,
हम तो’वर्णान्ध’हैं,
‘जुनून-ए-इश्क’के सफर में ।।
-आनन्द कुमार

5 Comments

  1. mani 26/06/2016
    • ANAND KUMAR 26/06/2016
  2. निवातियाँ डी. के. 26/06/2016
    • ANAND KUMAR 26/06/2016
  3. babucm 27/06/2016

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