इज़हारे इश्क…….मनिंदर सिंह “मनी”

तेरे इज़हारे इश्क का अंदाज़ मुझे पसंद आया,
तमाम उम्र गुजरी, तेरे इज़हार के इंतज़ार में,
जब होने लगा मौत से रु ब रु,
ऐ जालिम तूने भरी महफ़िल में बेवफा कह दिया |
ना तूने मौत का होने दिया, ना मौत ने मुझे तेरा,
मौत मुझे से सासे छीन रही और तुमने जीने की उम्मीद जगा दी,
क्या बड़बड़ा रहे हो नींद में, किसका इंतज़ार है तुमको,
घबरा के उठ खड़ा हुआ, श्रीमती जी ने झटक के मुझे जगाया ?
टेढ़ा टेढ़ा देख, परख रही थी मुझको,
झट से मैंने मौका सम्भाला, चलो प्रिये कही घूम आये,
कही बहार खाना खा आए,
श्रीमती जी मुस्काई, मेरी जान में जान आई ,
किया धन्यवाद मैंने उसका जिसने भी एतवार बनाया |

12 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 26/06/2016
    • mani 26/06/2016
  2. C.m.sharma(babbu) 26/06/2016
    • mani 26/06/2016
    • mani 26/06/2016
  3. अरुण कुमार तिवारी 26/06/2016
    • mani 26/06/2016
  4. निवातियाँ डी. के. 26/06/2016
  5. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 26/06/2016
  6. sarvajit singh 26/06/2016
  7. Amar Chandratrai 27/06/2016

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