क्या लिखूं

आज फिर से कागज़ और कलम पर हमारा ध्यान आया
फिर से दिल की बातों को पन्नों पर उतारने का ख़याल आया
फिर से बहुत सी बातों का दिल में तूफ़ान आया
पर सोचती हूँ क्या लिखूं……..

जो काटे न कटे उस घडी को लिखूं
फूलों के साथ लिपटी काँटों की लड़ी को लिखूं
आग बरसाती यादों की फुलझरी को लिखूं
सोचती हूँ क्या लिखूं…….

जिसकी मुझे तलाश है वो अपनों का प्यार लिखूं
जिससे थोड़ी सी आस है वो अपना घरबार लिखूं
हर बार नयी चोट खाता अपनों पर ऐतबार लिखूं
सोचती हूँ क्या लिखूं …..

क्या बरसते बादल की छवि पन्नों पर रख दूँ
या ताक पर कभि न पुरे होने वाले सपनों को रख दूँ
या फिर कटघरे में अपनों को ही रख दूँ
सोचती हूँ क्या लिखूं ….

पूरी दुनया के धोके को
खिडकियों से आती हवा के झोंके को
क्षण भर के लिए खुश करती बारिसों को
या फिर झूटी शान और नुमाइशों को
किसे रख दूँ में कलम के नीचे
सोचती हूँ क्या लिखूं….

इस बार ऐसा क्या लिखूं जो हमें थोडा सुकून दे
दिल को थोडा आराम और हमें नया जूनून दे
जीने का थोडा रंग और खुशबु बिखेर दे
जो कुछ मेंरी और थोड़ी सबकी बलायें फेर ले
सोचती हूँ क्या लिखूं……

दिल की दरिया के किस हिस्से को पन्नों पर रख दूँ
जिंदगी की मुश्किलों को एक नयी परख दूँ
सभी अक्षमताओं को दरकिनार कर दूँ
सोचती हूँ क्या लिखूं….

क्या ये कोरा कागज़ समेत पायेगा दिल में उमड़े शैलाब को
या फीर ये भी औरों की तरह दे जायेगा झूठा दिलाशा आपको
मन से इस परेशानी को कैसे विदा कर दूँ
सोचती हूँ क्या लिखूं……

क्या पन्नों की किस्मत यही है
अपनी परेसानी उन्हें दे देना सही है
इस दुनिया में उनका अस्तित्व नहीं
क्योंकि वो हमारे साथ रहकर भी जीवित नहीं
पर मुझे तो है कुछ उनसे सुनना और कुछ अपनी कहूँ
सोचती हूँ क्या लिखूं…..

18 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 25/06/2016
    • shrija kumari 25/06/2016
  2. निवातियाँ डी. के. 25/06/2016
    • shrija kumari 25/06/2016
  3. mani 25/06/2016
    • shrija kumari 25/06/2016
    • shrija kumari 25/06/2016
    • shrija kumari 25/06/2016
  4. C.m.sharma(babbu) 26/06/2016
    • shrija kumari 26/06/2016
  5. Meena bhardwaj 26/06/2016
    • shrija kumari 26/06/2016
  6. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 26/06/2016
    • shrija kumari 26/06/2016
  7. Dev 30/05/2018
  8. Manoj kumar pandit 31/01/2019

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