कम्बख्त दिल

कम्बख्त दिल काबुमे न आया लाख संभाला पर फिसल गया।.
कभी सुख चैन के पीछे कभी शानोशौकत के लिए बहक गया।.
जबतक जो जो मीलता रहा तबतब सब बटोरने मे खोगया।
जीते जी सब भुलगया मरते मरते आखिर मे खुदा याद आ ही गया।.
(अशफाक खोपेकर)

5 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 25/06/2016
  2. निवातियाँ डी. के. 25/06/2016
  3. babucm 25/06/2016
  4. Dr Chhote Lal Singh 26/07/2016

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