रक्त- दान……मनिंदर सिंह “”मनी

रक्त- दान करने का आज मैंने मन बना लिया,
सारे महोल्ले को इक्क्ठा कर रक्त-दान,
का शिविर लगा लिया,
शुरू हुआ रक्त दान का कार्यक्र्म, पहले हुई रक्त की जाँच,
कुछ को नशे ने, कुछ को बीमारियों ने खा लिया,
देश को जिस युवा से उम्मीदें थी, उसने किस राह को अपना लिया,
कुछ आगे बढ़ा कार्यक्र्म, कोई यहाँ, कोई वहाँ,
गिर पड़ा रक्त देते ही, नौजवानों को जवानी की कमजोरी ने खा लिया,
कुछ हसने लगे, कुछ मुंह दूसरी तरफ करने लगे,
एक पल तो ऐसा लगा पुण्य की जगह पाप कमा लिया,
धीरे-धीरे कार्यक्र्म कुछ और आगे बढ़ा,
ख़ुशी की लहर उठ गयी में, नामो की लिस्ट को जब मैंने पढ़ लिया,
हर महजब का बाशिंदा था, रक्त दान के शिविर में,
लगा जैसे इंसानियत का पाठ हर किसी ने पढ़ लिया,
ना किसी का खून सफ़ेद, ना हरा, ना केसरी, ना नीला था,
सब लाल रंग में रंगे, फिर हमने कैसे फर्क कर लिया,
जरूरत नहीं मंदिर मस्जिद की दीवारों को ऊचा करने की,
सम्भालो देश के युवा को उसने विनाश की तरफ मुंह कर लिया,
रोने को अश्रु नहीं होंगे, जब आपकी औलाद ने कुछ गलत कर लिया |

18 Comments

  1. निवातियाँ डी. के. 24/06/2016
    • mani 25/06/2016
    • mani 25/06/2016
    • mani 25/06/2016
  2. Shishir "Madhukar" 24/06/2016
    • mani 25/06/2016
  3. sarvajit singh 25/06/2016
    • mani 25/06/2016
  4. chandramohan kisku 25/06/2016
    • mani 25/06/2016
  5. babucm 25/06/2016
    • mani 25/06/2016
  6. अरुण कुमार तिवारी 25/06/2016
    • mani 25/06/2016
  7. Meena bhardwaj 25/06/2016
    • mani 25/06/2016

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