मन्नू : षष्टम अंक

ठंडा पानी भरने जाते
एक एक लेकर ड्राम
धनिया लहसुन मे नमक पीसकर
उसमे खाते कच्चे आम

ज्येठ के मास मे अक्सर
फल पका करते थे
अन्न का सारा लोभ भुलाकर
फलों से उदराग्नि हरते थे

दिन मे दो दो बार नहाना
जिसके लिए बहाने बनाना
निर्वस्त्र होकर नदी मे जाना
मन मुस्किल जल प्रेम समझाना

मत्स्य पकड़ना, गुल्लिदण्डा खेलना,
क्रीड़ा स्थल मे दिन भर रहना
श्रावण मास मे ऊँची लहरों मे
तेज बहाव के साथ ही बहना

बाढ़ आने के कुछ दिन बाद
नदी तट से सूंदर पत्थर लाना
उनसे अक्सर खेल खेल मे
एक सपनो का घरोंदा बनाना

निष्पाप, निस्वार्थ भावनाओ का
बचपन कभी न लौट के आता
अपने बालपन को संतान मे पाओ
न्योछावर सब कर फिर जी जाओ

16 Comments

  1. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 24/06/2016
  2. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 24/06/2016
    • Mahendra Singh Kiroula 24/06/2016
  3. निवातियाँ डी. के. 24/06/2016
    • Mahendra Singh Kiroula 25/06/2016
  4. Shyam tiwari 24/06/2016
    • Mahendra Singh Kiroula 25/06/2016
  5. babucm 24/06/2016
    • Mahendra Singh Kiroula 25/06/2016
    • Mahendra Singh Kiroula 25/06/2016
    • Mahendra Singh Kiroula 25/06/2016
  6. अरुण कुमार तिवारी 24/06/2016
    • Mahendra Singh Kiroula 25/06/2016

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