वक़्त

वक़्त क्‍यों ठहरा सा हैं
ज़िन्दगी से क्‍यों उलझा सा हैं

कभी अपना तो कभी बेगाना सा हैं
इश्क़ के माहौल में वक़्त बेकाबू सा हैं

वक़्त की नजाकतों से कर ली हम ने भी मोहब्बत,
अब वक़्त भी हमारा दीवाना सा हैं

:-अभिषेक शर्मा

24 Comments

  1. अकिंत कुमार तिवारी 23/06/2016
  2. babucm 23/06/2016
  3. अरुण कुमार तिवारी 23/06/2016
  4. Shishir "Madhukar" 23/06/2016
  5. RAJEEV GUPTA 23/06/2016
  6. निवातियाँ डी. के. 23/06/2016
  7. आदित्‍य 23/06/2016
  8. mani 23/06/2016
  9. Inder Bhole Nath 23/06/2016
  10. sarvajit singh 23/06/2016
  11. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 24/06/2016

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