कहीं डूबा है कोई यादों मे…

कहीं जख्म है नासूर बनें,कहीं समंदर बसा है आँखों मे,
कहीं तन्हा हुआ सा है कोई,कहीं सुलग रहा कोई रातों मे…
कुछ इस क़दर बेताब हुए, दीवानें राह-ए-उल्फ़त मे,
कहीं जीना कोई भूल बैठा, तो कहीं डूबा है कोई यादों मे…

…इंदर भोले नाथ…
http://merealfaazinder.blogspot.in/

10 Comments

  1. अरुण कुमार तिवारी 23/06/2016
  2. निवातियाँ डी. के. 23/06/2016
  3. mani 23/06/2016
  4. shrija kumari 23/06/2016
  5. Shishir "Madhukar" 23/06/2016
  6. Inder Bhole Nath 23/06/2016
  7. C.m.sharma(babbu) 23/06/2016
  8. chandramohan kisku 24/06/2016

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