हुनर

गूंथे जाते है माला में पुष्प वही
हर मौसम में खिलने का जो हुनर जानते है ।।

मुरझाये पुष्प स्वयं ही अक्सर,
शाखाओ से टूटकर बिखर जाया करते है ।।



डी. के. निवातियाँ ??

26 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 23/06/2016
    • निवातियाँ डी. के. 23/06/2016
  2. अरुण कुमार तिवारी 23/06/2016
    • निवातियाँ डी. के. 23/06/2016
  3. Shyam tiwari 23/06/2016
    • निवातियाँ डी. के. 23/06/2016
  4. sarvajit singh 23/06/2016
    • निवातियाँ डी. के. 23/06/2016
  5. babucm 23/06/2016
    • निवातियाँ डी. के. 23/06/2016
  6. RAJEEV GUPTA 23/06/2016
    • निवातियाँ डी. के. 23/06/2016
    • निवातियाँ डी. के. 23/06/2016
    • निवातियाँ डी. के. 23/06/2016
  7. mani 23/06/2016
    • निवातियाँ डी. के. 23/06/2016
  8. Meena bhardwaj 23/06/2016
    • निवातियाँ डी. के. 23/06/2016
  9. chandramohan kisku 24/06/2016
    • निवातियाँ डी. के. 24/06/2016
  10. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 24/06/2016
  11. निवातियाँ डी. के. 24/06/2016
  12. Dr Swati Gupta 25/06/2016
    • निवातियाँ डी. के. 25/06/2016

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