चलो उठो जागो

चलो उठो जागो

सुबह की चांदनी
ठिठुरती रात में
पक्षियों की चहचहाहट
हमें कुछ सिखाती है ।
चलो उठो——-
ओ धरा के सितारों
अब तुम जगमगाओ
बच्चे जो कि—–
भविष्य हैं देश का
चलो उठो
तुम स्कूल को जाओ
नारी उठ प्रात: भोर में
अपने सारे काम निपटाओ
सारे कामों से निवृत हो
अच्छा खाना तुम बनाओ
घर वालों को खिलाकर तुम
बाद में खुद भी भोजन खाओ
ओ नर तु कब तब सोएगा ।
चल उठ अपने काम से जा
मेहनत और लग्र से तु
मिट्टी में सोना उपजा
उड़ी हुई सोने की चिडिय़ा
उसे पकडक़र वापिस ला
सोने की चिडिय़ा को तो
सोने का चुग्गा चाहिए
इसलिए ही सोने का चुग्गा
तु अपने खेतों में उगा ।

2 Comments

  1. Dr Chhote Lal Singh 21/06/2016
  2. babucm 22/06/2016

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