ऐ कलम……मनिंदर सिंह “मनी”

ऐ कलम ठहर जा अभी,
मेरी आँखों में आसुओ के जाम बाकी है,
दिल के हज़ारों टुकड़े हुए,
हर टुकड़े पर उसकी बेवफाई की छाप बाकी है,
उम्मीद न कर मुझसे,
ख़ुशी का गीत कोई लिख पाउँगा,
दिल से दिल को बटाने का,
खेल खेला था उसने,
चल गयी वो चाल अपनी, मेरी चाल का चलना बाकी है,
लत नहीं मुझे रम में रम जाने की,
उम्मीद नहीं उसके परत आने की,
पड़े उसकी किताबो में सूखे गुलाबो का,
बेशकीमती लिबासो, बुलेट के पेट्रोल का हिसाब बाकी है,
दस्तूर कैसा है ये ज़माने का,
जब तक चाहा खेला जज्बातो से,
चलो जहाँ भी रहे वो खुश रहे,
शादी उसकी में यार बन उसका, मेरा नाचना अभी बाकी है,
दुःख-सुख, आना-जाना,
हसना-रोना सारी उम्र लगा रहेगा,
दिल खोल के हस लो यारो, जितनी जिंदगी बाकी है |

18 Comments

  1. arun kumar tiwari 21/06/2016
    • mani 21/06/2016
    • mani 21/06/2016
  2. निवातियाँ डी. के. 21/06/2016
    • mani 21/06/2016
  3. Shishir "Madhukar" 21/06/2016
    • mani 21/06/2016
  4. Kajalsoni 21/06/2016
    • mani 21/06/2016
  5. प्रियंका 'अलका' 21/06/2016
    • mani 21/06/2016
  6. Inder Bhole Nath 21/06/2016
    • mani 21/06/2016
  7. sarvajit singh 21/06/2016
    • mani 21/06/2016
  8. Meena bhardwaj 21/06/2016
    • mani 22/06/2016

Leave a Reply to प्रियंका 'अलका' Cancel reply