प्रेम का खेल

प्रेम की रचना में शब्‍दो का वो मेल
जैसे राधा संग श्‍याम का सुुन्‍दर प्रेम

मीरा का भी अद्भुत था प्रेम
समपर्ण समर्पित भक्ति का मेल

आसमांं में असंख्य तारे अनेेक
देखो अद्भुत हैं इसका चंदा से मेल

सागर को होता हैं लहरों से अधिक प्रेम
सावन में होते हैं जैसे बारिश के खेल

कभी करूणा कभी पीड़ा और त्‍याग का मेल
ईश्वर का हैं ये , अद्भुत प्रेम का खेल

:-अभिषेक शर्मा

20 Comments

  1. आदित्‍य 19/06/2016
  2. Shishir "Madhukar" 19/06/2016
  3. निवातियाँ डी. के. 19/06/2016
  4. अकिंत कुमार तिवारी 19/06/2016
  5. mani 19/06/2016
  6. Kajalsoni 19/06/2016
  7. arun kumar tiwari 19/06/2016
  8. C.m.sharma(babbu) 19/06/2016
  9. sarvajit singh 19/06/2016

Leave a Reply