इच्छायें

क्यो बदल जाती हैं
जाने कहाँ से उत्पन्न हो जाती हैं

एक दिन थी कुछ छोटी
फिर कैसे ये विशाल बन जाती है

कभी मन में प्रीत जगाती हैं
कभी आपस में ही जलाती हैं

इच्छाओं का कोई घर नही
मस्तिष्क से उतर कर मन में समा जाती हैं

:-अभिषेक शर्मा

20 Comments

  1. arun kumar tiwari 16/06/2016
  2. आदित्‍य 16/06/2016
  3. sarvajit singh 16/06/2016
  4. RAJEEV GUPTA 16/06/2016
  5. babucm 16/06/2016
  6. Shishir "Madhukar" 16/06/2016
  7. mani 16/06/2016
  8. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 17/06/2016
  9. निवातियाँ डी. के. 17/06/2016
  10. अकिंत कुमार तिवारी 19/06/2016

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