मैं लिखता रहूँगा!; अरुण कुमार तिवारी

मैं लिखता रहूँगा!
मैं लिखता रहूँगा!

दिखाओ नहीं बन्दिशों की कटारी,
सजाओ नहीं कँट वर्तुल ये क्यारी,
भले साँस रोधित भले हो तिजारी,
मैं दिखता रहूँगा!
मैं लिखता रहूँगा!

बिना द्रोण को ही चढ़ाये अँगूठा,
सधूंगा करूँगा यतन वो अनूठा,
भले गिर पडूँ पर उठूँगा चलूँगा!
मैं सिखता रहूँगा !(सीखता)
मैं लिखता रहूँगा!

भले कोई कीमत नहीं आज मेरी,
लगाता फिरूँगा मै हर राह फेरी,
हो किंचित भले भाव लगने में देरी,
मैं बिकता रहूँगा!
मैं लिखता रहूँगा!

कलम छीन लो छीन लो ये कहानी,
सुखा दो ये दरिया समन्दर का पानी,
तपे मरु धकेलो उखाड़ो जवानी,
मैं टिकता रहूँगा!
मैं लिखता रहूँगा!

अगर मर भी जाँऊ नही आज गम है,
है जीवन जिया जो कहीं से क्या कम है?
भले तन है सूखा मगर रूह नम है,
मैं मिटता कहूँगा!
मैं लिखता रहुगा!

मैं लिखता रहूँगा!!

-‘अरुण’
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13 Comments

  1. विजय कुमार सिंह 15/06/2016
  2. arun kumar tiwari 15/06/2016
    • arun kumar tiwari 15/06/2016
  3. Shishir "Madhukar" 15/06/2016
  4. निवातियाँ डी. के. 15/06/2016
  5. निवातियाँ डी. के. 15/06/2016
  6. RAJEEV GUPTA 15/06/2016
  7. arun kumar tiwari 15/06/2016
  8. babucm 16/06/2016
    • arun kumar tiwari 16/06/2016
  9. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 17/06/2016
  10. arun kumar tiwari 17/06/2016

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