यादो का गुलिस्ताँ……….

तुम चले तो गये अजनबी बनकर
मगर यादो का गुलिस्ताँ अभी मेरे पास है ……….!
सजाए बैठा हूँ इस उम्मीद में
मिलोगे कभी जिंदगी के किसी मोड़ पर ………….!
खिदमत ऐ पेश करूँगा स्वागत में,
एक एक शब्द महक उठेगा गुलदस्ते में याद बनकर ..!!
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डी. के. निवातियाँ [email protected]

12 Comments

  1. Rajeev Gupta 10/06/2016
    • निवातियाँ डी. के. 10/06/2016
  2. Shishir "Madhukar" 10/06/2016
    • निवातियाँ डी. के. 11/06/2016
  3. विजय कुमार सिंह 10/06/2016
    • निवातियाँ डी. के. 11/06/2016
  4. C.m. sharma(babbu) 10/06/2016
    • निवातियाँ डी. के. 11/06/2016
    • निवातियाँ डी. के. 11/06/2016
  5. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 12/06/2016
    • निवातियाँ डी. के. 13/06/2016

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