नाम पाने की होड़

देश मेरे में नाम पाने की होड़ उठी,
मेरे धर्म का, मेरी जात का,
मेरे शहर-गांव का, मेरा रिश्तेदार,
सोच लोगो की एक दूसरे से जुडी,
इसने क्या किया, इसने कब किया,
ये अच्छा था, ये बुरा था,
बातों ही बातों में बात आगे बड़ी,
हुई चैनल्स पे बहस, लगे नारे,
सोसल साइट पर दी एक दूसरे को पटखनी,
धीरे-धीरे अनशन के लिए भीड़ जुडी,
कितने बेवजह घर जले, कितने बेक़सूर लोग मरे,
कितने अनाथ हुऐ, कितनो के सुहाग उजड़े,
पूछती है हमसे इमारते, तो कही सड़के,
दर्दनाक जब ये घटना घटी,
झूठे दिखावे, लोक प्रसिद्धि,
तरीका कोई भी बस पैसा हो,
कोई मरता है तो मरे,
हर किसी को खुद की पड़ी,
देश मेरे में नाम पाने की होड़ उठी,

6 Comments

  1. निवातियाँ डी. के. 09/06/2016
    • mani 10/06/2016
  2. Shishir "Madhukar" 09/06/2016
    • mani 10/06/2016
  3. babucm 10/06/2016
    • mani 10/06/2016

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