बादल आखेट

सर-सनन-सनन तूफाँ आँधी
नभ चहुँओर निखालस^ काला
बादल आखेट निराला..
जब आग बरसती थी नभ से
वह खेत पड़ा सूना कब से
तब देख अगन उस धरती की
अम्बुद ने तपन संभाला
बादल आखेट निराला..
धरणी विधवा, हलधर हताश
एकदम उदास,बिलकुल निराश
तब देख दशा क्षिति-सेवक की
जलधर भी ‘रो’ डाला
बादल आखेट निराला
-रणदीप चौधरी ‘भरतपुरिया’

(^ निखालस=पूरी तरह से)

8 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 09/06/2016
    • Randeep Choudhary 09/06/2016
  2. babucm 09/06/2016
  3. निवातियाँ डी. के. 09/06/2016
    • Randeep Choudhary 09/06/2016
    • Randeep Choudhary 09/06/2016
  4. mani 09/06/2016
    • Randeep Choudhary 09/06/2016

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