दो-दो हाथ ……


रुक सा गया हूँ कुछ थम सा गया हूँ
वक़्त के हालातो से करने दो दो हाथ
जिंदगी की पहेलियों को देने को मात
उगते सूरज से अब शाम की तरह ढल सा गया हूँ !!
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डी. के. निवातियाँ [email protected]

9 Comments

  1. निवातियाँ डी. के. 08/06/2016
  2. Shishir "Madhukar" 08/06/2016
    • निवातियाँ डी. के. 08/06/2016
  3. विजय कुमार सिंह 08/06/2016
    • निवातियाँ डी. के. 09/06/2016
  4. babucm 09/06/2016
    • निवातियाँ डी. के. 09/06/2016
  5. RAJEEV GUPTA 09/06/2016
    • निवातियाँ डी. के. 09/06/2016

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