बदलती ज़िन्दगानी – शिशिर मधुकर

शहर में जिंदगी रोशन थी महके ख्वाब लिए
बेफिक्र हम भी चल रहे थे ये आफ़ताब लिए
एक तूफान उठा उसने सभी कुछ तोड़ दिया
हर खुशी छीन रुख ठंडी हवा का मोड़ दिया
हमें उम्मीद है बिगड़े हालात फ़िर से बदलेंगे
जवां दिलों में नई हसरतों के सुर भी मचलेँगे
इसी का नाम तो एक बदलती ज़िन्दगानी है
कितनी सदियों से चलती आई ये कहानी है

शिशिर मधुकर

10 Comments

  1. निवातियाँ डी. के. 09/06/2016
    • Shishir "Madhukar" 09/06/2016
  2. विजय कुमार सिंह 09/06/2016
    • Shishir "Madhukar" 09/06/2016
  3. mani 09/06/2016
  4. Shishir "Madhukar" 09/06/2016
  5. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 10/06/2016
  6. Shishir "Madhukar" 10/06/2016
  7. babucm 10/06/2016
  8. Shishir "Madhukar" 10/06/2016

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