सूखी रेती – शिशिर मधुकर

मुहब्बत की मेरी प्यास है सूखी रेती की तरह
अभी तक सूनी पडी हैं मेरे इस दिल की गिरह
किसी दरिया ने आब इस पर जो बहाया होता
यहाँ फूलों का चमन कुदरत ने खिलाया होता

शिशिर मधुकर

12 Comments

  1. Rajeev Gupta 08/06/2016
    • Shishir "Madhukar" 08/06/2016
  2. विजय कुमार सिंह 08/06/2016
    • Shishir "Madhukar" 08/06/2016
  3. sushil 08/06/2016
  4. Shishir "Madhukar" 08/06/2016
  5. निवातियाँ डी. के. 08/06/2016
  6. Shishir "Madhukar" 08/06/2016
  7. योगेश कुमार 'पवित्रम' 09/06/2016
  8. Shishir "Madhukar" 09/06/2016
  9. babucm 09/06/2016
  10. Shishir "Madhukar" 09/06/2016

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