मुझे गर्भ में मत मारो।

I composed this poem against the Female Foeticide in India…
“मुझे गर्भ में ही मत मारो, मुझे इस संसार में आने दो माँ।
मै भी तो आपके शरीर का हिस्सा हूँ,
मुझे ऐसे ही न कट जाने दो माँ।
बेटी हूँ तो क्या हुआ अपना नाम बनाऊँगी,
बेटे की तरह मै भी आपका नाम रोशन करके दिखाऊँगी।
मुझे बाहर आने दो, अपना प्यार पाने दो माँ,
यूँ ही अपने अंश को न कट जाने दो माँ।
तेरे आँचल को मै ख़ुशियों से महकाऊँगी,
बेटे की तरह मै भी तेरे दूध का क़र्ज़ चुकाऊँगी माँ।
डॉक्टर इंजीनियर या ऑफिसर बनके दिखाऊँगी,
अपने परिवार के सम्मान को आगे बढाऊँगी माँ।
अपनी ममता की छाव् का सुख मुझको भी पाने दो,
तेरे प्यार की शीतलता में मुझको भी आने दो माँ।
मुझे गर्भ में ही मत मारो, मुझे इस संसार में आने दो माँ।”

6 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 02/06/2016
    • Dr Swati Gupta 03/06/2016
  2. Rajeev Gupta 02/06/2016
    • Dr Swati Gupta 03/06/2016
  3. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 03/06/2016
    • Dr Swati Gupta 03/06/2016

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