देखों सवेरा हो गया!

माँ कह रही बैठ सिरहाने
उठ जाओ मेरे लाल, देखो सवेरा हो गया!

टेशू फूलों पर तितलियाँ सहकी
भ्रमर गुंजन से कलियाँ बहकी
बागों में कूकू कोयल कहकी
मोर लगे नाचने मैना चहकी
गौरैया भी आ गयी तुम्हे जगाने
तुम भी करो धमाल, देखो सवेरा हो गया!

फूल फूल खुशबू से महके
मदिरालय सा गुलशन बहके
शैल शिला रक्तिम हो चमके
अरुण चाहूओर आ धमके
वासर धवल रश्मियाँ लगा फ़ैलाने
तुम भी न फेरो गाल, देखो सवेरा हो गया!

मंद पवन सरकाए घुंघट
सखियाँ नाचे, नाचे पनघट
मन मयूरा बदले करवट
दिल चुराएँ सावरिया नटखट
प्रेम बावरी लगी पायल खनकाने
तुम भी मिलाओ ताल, देखो सवेरा हो गया!

दक्षिण ने मलय समीर बहाई
नदियाँ सापिन सी लहराई
निशाचर भाग गये अकुलाई
प्रकृति ने तोड़ी अपनी जम्हाई
शबनम भी कही गयी मुंह छुपाने
तुम भी धरो रूप विकराल, देखो सवेरा हो गया!
!
!
✍सुरेन्द्र नाथ सिंह “कुशक्षत्रप”✍

9 Comments

  1. Dr Swati Gupta 29/05/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 29/05/2016
  2. Rajeev Gupta 29/05/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 29/05/2016
  3. Shishir "Madhukar" 29/05/2016
  4. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 29/05/2016
  5. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 29/05/2016
  6. sarvajit singh 29/05/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 29/05/2016

Leave a Reply