आज कामवाली बाई नहीं आई।

Poem full of emotions??..

ये कलम थकती नहीं,
कुछ कहना चाहती है,
जो जज्वात दिल में है,
उन्हें शब्दों में बयां करना चाहती है।
कुछ बाते है अनकही,
सोचा जुबां पर ले आऊँ,
अपने दिल का हाल ,
कुछ उनको मै सुनाऊँ,
ओंठ काँपने लगे मेरे,
आँखे भर आयीं,
बातें बहुत खास थी वो
जो जुबां कह नहीं पायी,
मेरी कलम मेरी दोस्त बनी,
मेरे जज्बातों को शब्दों
में पिरो आई,
और हमारे दिल की बात,
इस तरह अपने पतिदेव तक पहुँचाई,
“आज ऑफिस न जाओ प्रिय,
थोडा काम में हाथ बंटा दो,
क्योंकि आज हमारी काम वाली
बाई नहीं है आई।”
By:Dr Swati Gupta

8 Comments

  1. babucm 28/05/2016
    • Dr Swati Gupta 29/05/2016
  2. Shishir "Madhukar" 28/05/2016
    • Dr Swati Gupta 29/05/2016
  3. sarvajit singh 28/05/2016
    • Dr Swati Gupta 29/05/2016
  4. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 28/05/2016
    • Dr Swati Gupta 29/05/2016

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