तुम तो ऐसे न थे ( लेखिका- मीरा देवी )

तुम तो ऐसे न थे ( लेखिका- मीरा देवी )
तुम तो ऐसे न थे
फिर बदली क्यों अदा,
अजनबी से लगते है अब ये अफ़साने,
ज़ुबाँ खामोश है टूट गयी वीणा की तारे,
कौन गाएगा अब वो प्रेम के तराने,
घनघोर कारी बदरा के साथ
उलझी मेरी जुल्फो को,
सुलझाते थे अपने रस भरे अधरों से,
उलझी वो जुल्फे अब बन गयी कठोर लटए
हिलती नहीं अब इन बेदर्द हवा के झोंको से भी,
रस भरे चक्षुओं से निहारते थे,
ये रूप सौंदर्य,
प्रेम शब्द के मोतियों से सजाते थे,
ये बदन,
जाने क्यों गांठ मारना भूल गए,
उन मोतियों की माला मे
एक-एक कर बिखर गए,
मेरी माला के सब मोती,
बिन माला के प्रियतम, कैसे अब श्रृंगार करू,
ढूंढ लाओ मेरे सब मोती,
फिर से दो मुझपे सजा,
तुम तो ऐसे न थे,
फिर बदली क्यों अदा,

6 Comments

  1. tamanna 28/05/2016
  2. babucm 28/05/2016
  3. Imran Ahmad 28/05/2016
  4. Shishir "Madhukar" 28/05/2016
  5. RAJEEV GUPTA 28/05/2016
  6. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 28/05/2016

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