अंजाम…..

इश्क़ में तेरे इस कदर मेरे जज़्बात हो गए….
सुनते ही दर्द किसी का भी हम यूं ही रो पड़ें…

मौजें जुनूए इश्क़ में थे आसमान पे हम….
ठोकर लगी जो वक़्त की ज़मींदोज़ हो पड़े…

कुछ इस रंज से विदा किया तूने जहाँ से हमें….
दुश्मन भी जिसको देख के बेबस हो रो पड़े….

मौत इस कदर हसीं होगी क्या किसी की कभी “चन्दर’…
छुआ था ज़ख़्मों को तूने यहाँ..वहां से कँवल खिल पड़े…
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/सी.एम शर्मा (बब्बू)

3 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 28/05/2016
    • babucm 28/05/2016
  2. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 29/05/2016

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