अरमान – शिशिर मधुकर

आँखो में हम जितने सपने सजाते हैं
सभी अरमान वो पूरे कहाँ हो पाते हैं
कुछ लोग जो दिल के करीब आते है
मिलते है बिछड़ते है और तड़पाते हैं
मिलकर भी रूह जब रूह से ना जुड़े
ऐसे रिश्ते तो पूरी उम्र भर तरसाते हैं

शिशिर मधुकर

12 Comments

  1. babucm 28/05/2016
  2. Shishir "Madhukar" 28/05/2016
  3. sarvajit singh 28/05/2016
  4. Shishir "Madhukar" 28/05/2016
  5. RAJEEV GUPTA 28/05/2016
  6. Shishir "Madhukar" 28/05/2016
  7. Dr Swati Gupta 28/05/2016
  8. Shishir "Madhukar" 28/05/2016
  9. MANOJ KUMAR 28/05/2016
  10. Shishir "Madhukar" 28/05/2016
  11. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 29/05/2016
  12. Shishir "Madhukar" 29/05/2016

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