आकांक्षा

आकांक्षाओं की उड़ान लिए , हर इंसान चल रहा है
आकांक्षाओं की चाहत लिए , हर इंसान चल रहा है
ये मेरा है , ये तेरा है , ये उसका है , ये किसका है
इन् सभ सवालो की कश्मकश लिए , हर इंसान जी रहा है
इस मोह माया की नगरी में , सभ माया के प्राणी है
इस माया के हाथो को थामे , हर इंसान जी रहा है
जिस पे है धन , उस पे ना तन ,
जिस पे है तन , उस पे ना धन
हर कोई इस धन को पाने की जंग को लड़ रहा है
हर कोई खुद को इस जंग में शामिल कर रहा है
हम खुद ही तोह आपने बच्चों को माया का है पाठ पढ़ाते
फिर खुद ही हम उनसे अपना मोह जताते
जो माया से पनपे बच्चे है , वो मोह से कैसे खुद को जोड़े
जो पैसो से पलते बढ़ते है , वो प्यार की कीमत क्या पहचाने

2 Comments

  1. babucm 28/05/2016
    • tamanna 28/05/2016

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