झूमती हुई रवानी

ये कैसी हवा बह चली,
रंगत इसकी बडी अनजानी लगती है ।
तीर सी चुभती है कभी,
कभी ये झूमती हुई रवानी लगती है ।।
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डी. के. निवातियॉ ………।।

22 Comments

  1. RAJEEV GUPTA 27/05/2016
    • निवातियाँ डी. के. 09/06/2016
  2. निवातियाँ डी. के. 27/05/2016
  3. babucm 27/05/2016
    • निवातियाँ डी. के. 27/05/2016
  4. Shishir "Madhukar" 27/05/2016
    • निवातियाँ डी. के. 27/05/2016
  5. Meena bhardwaj 27/05/2016
    • निवातियाँ डी. के. 27/05/2016
  6. MANOJ KUMAR 27/05/2016
    • निवातियाँ डी. के. 27/05/2016
  7. प्रियंका 'अलका' 27/05/2016
    • निवातियाँ डी. के. 27/05/2016
  8. sarvajit singh 27/05/2016
    • निवातियाँ डी. के. 27/05/2016
  9. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 28/05/2016
    • निवातियाँ डी. के. 08/06/2016
  10. Dr Swati Gupta 29/05/2016
    • निवातियाँ डी. के. 08/06/2016
  11. विजय कुमार सिंह 08/06/2016
  12. mani 09/06/2016
    • निवातियाँ डी. के. 09/06/2016

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