वेनाम रिश्ता

किताब को वरक-वरक होने से रोके कोई
वेनाम रिश्ता खत्म होने से रोके कोई

मुझे मेरी मोहब्बत की कदर नही कुछ भी
बस उस पर सितम होने से रोके काई

चाहें तो आजमॉ सकते दाँव-पेच हम भी
पर ये गुनाह तमाम होने से रोके कोई

खौफ से मशालें अब खुद को बुझाने लगी
तूफाँ को सरताजे-ए-तम होने से रोके कोई

खुद को खुद मे हीं दफन कर लूँ तन्हा
मुझ इस तरह खत्म होने से रोके कोई

6 Comments

  1. निवातियाँ डी. के. 25/05/2016
  2. babucm 26/05/2016
    • Nirdesh 26/05/2016
      • babucm 26/05/2016
    • Nirdesh 26/05/2016
  3. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 26/05/2016

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