जख्म

मिला जख्म जो गैरों से, उसका मनन नहीं होता!
ऐसे जख्मों का तन में, स्थायी रहन नहीं होता!!
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देते जख्म जब अपने, वह दर्द सहन नहीं होता!
तन भुला दे भले, दिलसे कभी गमन नहीं होता!!
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✍सुरेन्द्र नाथ सिंह “कुशक्षत्रप”✍

14 Comments

  1. babucm 25/05/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 25/05/2016
  2. RAJEEV GUPTA 25/05/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 25/05/2016
  3. Kajalsoni 25/05/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 25/05/2016
  4. निवातियाँ डी. के. 25/05/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 25/05/2016
  5. Shishir "Madhukar" 25/05/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 25/05/2016
  6. प्रियंका 'अलका' 25/05/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 25/05/2016
  7. Dr Swati Gupta 25/05/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 25/05/2016

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