माँ अनपढ़ थी, कबीर की तरह।

माँ अनपढ़ थी, कबीर की तरह

माँ अनपढ़ थी,
कबीर की तरह,
कविता नहीं पढ़ पाती थी,
पर गीत गुनगुनाती थी,
देश के लिए काम करती थी,
पुरस्कार नहीं पायी थी।
उसे सरकार से डर न था
न कहने का खौफ,
न अभिव्यक्ति का भय,
जो चाहा कह दिया।
ऊँची मँहगाई पर
सरकार को कोस दिया,
प्यार करने के
उसके अपने तरीके थे,
शुद्ध देशी,भारतीय,
क्योंकि वह अंग्रेजी नहीं जानती थी,
अत:उसकी छाती की चौड़ाई
देश के बराबर थी,
माँ अनपढ़ थी,
कबीर की तरह।

************ महेश रौतेला

3 Comments

  1. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 25/05/2016
  2. निवातियाँ डी. के. 25/05/2016
  3. Dr Swati Gupta 25/05/2016

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