विश्वाश की डोर ……………..


रहने दो, न करो मजबूर इतना,
नैनों से अश्रु-धारा कही फुट न जाये ……………!
तेरी बेवफाई के जुल्मो सितम
सहते सहते सांसो की डोर टूट न जाये ………….!
बर्दाश्त की भी अपनी हद होती है,
बड़ी कमजोर होती है विश्वाश की डोर
कही बातो बातो बंधन ये टूट न जाये ……………..!!
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डी. के. निवातियाँ[email protected]

16 Comments

  1. प्रियंका 'अलका' 24/05/2016
    • निवातियाँ डी. के. 25/05/2016
  2. Shishir "Madhukar" 24/05/2016
    • निवातियाँ डी. के. 25/05/2016
  3. Kajalsoni 25/05/2016
    • निवातियाँ डी. के. 25/05/2016
  4. sarvajit singh 25/05/2016
    • निवातियाँ डी. के. 25/05/2016
  5. babucm 25/05/2016
    • निवातियाँ डी. के. 25/05/2016
  6. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 25/05/2016
    • निवातियाँ डी. के. 25/05/2016
  7. RAJEEV GUPTA 25/05/2016
    • निवातियाँ डी. के. 25/05/2016
  8. Dr Swati Gupta 25/05/2016
  9. निवातियाँ डी. के. 25/05/2016

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