बदनाम – शिशिर मधुकर

ज्यों रोज़ दिन ढलता और होती शाम है
दिल टूटने के किस्से भी यहाँ पर आम हैं
ग़म को भुलाने जब भी छलकते जाम है
आशिक ही तो ज़माने में हुए बदनाम हैं

शिशिर मधुकर

12 Comments

  1. babucm 23/05/2016
    • Shishir "Madhukar" 23/05/2016
  2. निवातियाँ डी. के. 23/05/2016
    • Shishir "Madhukar" 23/05/2016
  3. sarvajit singh 23/05/2016
    • Shishir "Madhukar" 23/05/2016
  4. mani 23/05/2016
    • Shishir "Madhukar" 23/05/2016
  5. MANOJ KUMAR 23/05/2016
    • Shishir "Madhukar" 23/05/2016
  6. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 23/05/2016
  7. Shishir "Madhukar" 23/05/2016

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