ईर्ष्या और द्वेष

Jealousy is the biggest enemy of a person..

ईर्ष्या और द्वेष का भाव अपने मन से निकाल दो,
मैं और हम के अंतर को जानो,
हम को अपना मान लो,
जब तक मै में फंसा रहेगा,
अन्तर्मन् में द्वन्द चलता रहेगा,
उसके पास सब कुछ है,
मेरे पास क्यों नहीं,
मेहनत का खेल है ये सब
तू ये क्यों अभी तक समझ न पाया,
किसी ने मेहनत से सुख सम्पति को पाया,
किसी ने अपनी मेहनत और समय,
अपने बच्चों को योग्य बनाने में लगाया,
तूने ईर्ष्या और द्वेष में पड़कर,
अपनी सुख शांति को भी गँवा दिया,
इसी चिंता में अपने स्वास्थ्य
को भी दाव पर लगा दिया,
जब अंत समय आएगा,
तो दोनों हाथों को मलता रह जाएगा,
भगवान् जब पूछेगा तुझसे,
सारी उम्र किया क्या तूने,
तब क्या उत्तर दे पायेगा,
हम सब एक ही ईश्वर की संतान है,
और उन्ही से द्वेष भाव रखा था तूने,
क्या यह तू भगवान को बता पायेगा,
जिनके पास सारे उत्तर हैं,
तू उनके सामने निरुत्तर रह जाएगा,
और फिर पछताने के सिवाय तेरे पास,
कुछ न रह पायेगा, कुछ न रह पायेगा।

By:Dr Swati Gupta

5 Comments

  1. निवातियाँ डी. के. 20/05/2016
    • Dr Swati Gupta 21/05/2016
  2. babucm 20/05/2016
    • Dr Swati Gupta 21/05/2016
  3. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 21/05/2016

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