प्यारा गांव

प्यारा गांव

गांव मेरा है प्यारा,
सब गांवों से न्यारा ।
जब शहर को जाता हूं
गांव की यादें संग लेता हूं
तन्हाई में कभी बैठ कर
यादों को मैं संजोता हूं
उन यादों को संजोकर
बुनता हूं एक हार प्यारा,
सब हारों से है न्यारा ।
गांव मेरा है प्यारा,
सब गांवों से न्यारा ।
खुशबु रोम-रोम में मेरे
मेरे गांव की मिट्टी की
मिट्टी नाम दिया दुनिया ने
वो भूमि तो मां है मेरी
सोचता हूं कटे जीवन मेरा
उस पावन भूमि पर सारा ।
सब जगहों से है न्यारा ।
गांव मेरा है प्यारा,
सब गांवों से न्यारा ।
मेरे गांव की अल्हड़ बातें
रोज घुमने खेतों में जाते
खेतों में हरियाली देखकर
हम सब प्रसन्न हो जाते
मेरी प्रभू से है ये प्रार्थना
बीते मेरा जन्म यहीं पर
देना यहीं जन्म दोबारा ।
गांव मेरा है प्यारा,
सब गांवों से न्यारा ।

4 Comments

  1. babucm 20/05/2016
  2. Rajeev Gupta 20/05/2016
  3. निवातियाँ डी. के. 20/05/2016
  4. MANOJ KUMAR 20/05/2016

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