जिन खोजा तिन पाया-1…..

खोजत रहा जब मैं बाहर…
आपण को ही खो दिया…
दुःख संताप सब धर लिए मुझको…
वैरी मुआ सब जग भया….

वैरी मुआ सब जग भया….
चिंता बहुत सताए….
हर पल हर छिन्न खुशियां मेरी…
मिट्टी में मिल जाएं…..

मिट्टी में मिल जाएं…
सोच भयो बढ़ी भारी…
एक दिन इक बात फ़क़ीर की…
दिल में मेरे उत्तर गयो…

दिल में मेरे उत्तर गयो….
मैं अपने दिल में झाँका…
फिर न पूछो हाल क्या हुआ…
भीतर ही गयो समाये….

भीतर ही गयो समाये….
आनंद भयो मेरी माए….
रोग दोष संताप बिछड़े…
तन मन निर्मल हो गयो माए….

तन मन निर्मल हो गयो माए….
ना वैरी मैं किसी का….
ना कोई मेरा वैरी पायो….
समरस सब हो गया भायो….

समरस सब हो गया भायो….
परमानन्द फिर पायो…
मैं था उसका वो था मेरा….
एक रूप में समायो…

एक रूप में समायो…
एक ही एक सब ओर भायो….
न कोई दूसरा न अनेक…
एक ही एक सब ओर भायो ….
एक ही एक सब ओर….
\
/सी.एम. शर्मा (बब्बू)

14 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 18/05/2016
    • babucm 18/05/2016
  2. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 18/05/2016
    • babucm 19/05/2016
  3. mani786inder 18/05/2016
    • babucm 19/05/2016
  4. Kajalsoni 18/05/2016
    • babucm 19/05/2016
  5. Meena bhardwaj 18/05/2016
    • babucm 19/05/2016
  6. निवातियाँ डी. के. 19/05/2016
    • babucm 19/05/2016
  7. ALKA 19/05/2016
    • babucm 20/05/2016

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