अन्जान – मेरी शायरी……. बस तेरे लिए

अन्जान

आँखों ही आँखों में कह दी है हमनें
बात अपने दिल की ……………………….
पर अन्जान बने बैठे हैं वो ………………..
जो कभी हमें आॅंखों की भाषा समझाते थे

शायर : सर्वजीत सिंह
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8 Comments

  1. निवातियाँ डी. के. 17/05/2016
    • sarvajit singh 17/05/2016
  2. Shishir "Madhukar" 17/05/2016
  3. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 17/05/2016
    • sarvajit singh 17/05/2016
  4. babucm 17/05/2016
    • sarvajit singh 17/05/2016

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