नाराज़ – शिशिर मधुकर

मुझे मालूम है तू मुझसे क्यों नाराज़ हुआ
जगह ना दिल में मिलेगी तुझे अंदाज़ हुआ
मुहब्बत मगर मेरे जिस्म की गरम साँसे हैं
तुझे देखे बिना मेरे दो नयना भी रुआंसे हैं.

शिशिर मधुकर

14 Comments

  1. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 14/05/2016
    • Shishir "Madhukar" 14/05/2016
  2. प्रियंका 'अलका' 14/05/2016
    • Shishir "Madhukar" 14/05/2016
  3. mani786inder 14/05/2016
    • Shishir "Madhukar" 14/05/2016
  4. Meena bhardwaj 14/05/2016
    • Shishir "Madhukar" 14/05/2016
  5. sarvajit singh 14/05/2016
  6. Shishir "Madhukar" 14/05/2016
  7. निवातियाँ डी. के. 14/05/2016
  8. Shishir "Madhukar" 14/05/2016
  9. C.m. sharma (babu) 15/05/2016
    • Shishir "Madhukar" 15/05/2016

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