कला, संगीत व आवाज़ – शिशिर मधुकर

प्रेम में कला और संगीत काम आते हैं
प्रेमी इनसे भी एक दूजे को रिझाते हैं
छवि बृजवासियों के मन में बसाने को
कन्हैया अपनी दिव्य बांसुरी बजाते हैं .

प्रेम में डूबी हुई आवाज़ भी करिश्मा है
इससे लाखों दिलों में गुलाब खिलते हैं
मीरा के भक्ति भरे बोलों के अधीन हुए
कलियुग में भी कान्हा उनको मिलते हैं .

शिशिर मधुकर

12 Comments

  1. mani786inder 13/05/2016
  2. Shishir "Madhukar" 13/05/2016
  3. babucm 13/05/2016
  4. Shishir "Madhukar" 13/05/2016
  5. आभा 13/05/2016
  6. Shishir "Madhukar" 13/05/2016
  7. निवातियाँ डी. के. 13/05/2016
  8. Shishir "Madhukar" 13/05/2016
  9. sarvajit singh 13/05/2016
    • Shishir "Madhukar" 13/05/2016
      • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 14/05/2016
        • Shishir "Madhukar" 14/05/2016

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