अल्फाज़ो मे

और नहीं जिक्र करना मुझे तेरा अपने अल्फाज़ो में,
बड़ा दर्द देते सूखे गुलाब, जो अभी तक है किताबो में,
अक्सर पूछ लेती हवाएँ तेरे बारे जब हूँ पैर उन्ही राहों में,
अश्क रुकते नहीं जब देखता हूँ तेरे खत बंद लिफाफों में,
खुद ब खुद सामने आ जाती है तेरी यादें, तन्हा रातों में,
अंजान ना थे इश्क की रंगत से, फिर भी खुद को लुटा बैठे,
बस अब नहीं जिक्र करना “मनी” तेरा अपने अल्फाज़ो मे |

मनिंदर सिंह “मनी”

6 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 12/05/2016
    • mani786inder 12/05/2016
  2. निवातियाँ डी. के. 12/05/2016
  3. babucm 13/05/2016
  4. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 14/05/2016
    • mani786inder 14/05/2016

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