जीवन

जीवन

बेरूखी आंधियों में
वक्त के थपेड़ों ने
मुझे ये सिखाया है ।
आंखें मलते हुए चलते
छोटी-छोटी ठोकरों ने
मुझे इंसान बनाया है ।
जीवन में खतरे की घंटी
न जाने किस ओर बजे
बाढ आए बह निकले
तुफां आएं ये उड़ चले
ले जाक र धकेल दे
किसी गहरे नदी नाले मे
उसमें रहने वाली रेत में
कि सी जगह पड़ी सीप ने
मुझे ये सिखाया है ।
आंखें मलते हुए चलते
छोटी-छोटी ठोकरों ने
मुझे इंसान बनाया है ।
मोड़ बहुत से आए
हर मोड़ एक जैसा था
कहीं संभला कहीं गिर पड़ा
मुझे हवा ने उठाया
मोड़ पर पड़े गड्ढों ने
छोटे मोटे पत्थरों ने
पांव के इन छालों ने
भाले जैसे कांटों ने
मुझे ये सिखाया है ।
आंखें मलते हुए चलते
छोटी-छोटी ठोकरों ने
मुझे इंसान बनाया है ।

3 Comments

  1. babucm 11/05/2016
  2. Abha.ece 11/05/2016
  3. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 11/05/2016

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