बस यूँ ही ….

बस यूँ ही ….

१. गैरों में रौशनी तलाशता रहा मैं
मेरे अपने तो मेरा हमसाया थे
चकाचौंध के परे कभी देखा ही नहीं

२) तक़दीर के खंजर से लहूलुहान हो गए तो क्या
खुद को मरहम लगाना अब मेरी फितरत में है

३) मेरी उमंगो के हौंसलों की बात न पूछो
अपनी इजाज़त लेना भी इन्हें गवारा नहीं

४) किस्मत की क्या मजाल जो हमें जुदा कर सके
जब खुदा मिला देता है हमें बार बार

५) वैसे तो हम हया के धागों में बंधे रहते हैं
न जाने क्यों उनसे बेबाक हो जाते हैं

५) वो मेरी छुपाने की अदा के कायल हो गए
हम उनकी जताने की अदा के कायल हो गए

७) मेरे हुस्न की तारीफ उसने कुछ इस तरह की
चाँद की चांदनी भी शर्मसार हो गयी
मेरे हुनर की कद्र उसने कुछ इस तरह की
शायर की शायरी भी दरकिनार हो गयी

८) खुदा से शिकायत है तो बस इतनी
जब आसमा छीन लेना था तेरी रज़ा में शामिल
फिर क्यों सिखाया मुझे उड़ान भरना

९) चाहत क्या होती है
तुझे जी कर जान लिया हमने
जीना क्या होता है
तुझे चाह कर जान लिया हमने

SWATI NAITHANI

4 Comments

  1. babucm 09/05/2016
  2. Shishir "Madhukar" 09/05/2016
  3. निवातियाँ डी. के. 09/05/2016
  4. swati 09/05/2016

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