जिंदगी की कहानी……….

बिछड़ गए सब यार बचपन के
कुचल गए अरमान सब मन के
यौवन का मीत भी साथ न रहा
काँधे पर किसी का हाथ न रहा
बस अब मैं और मेरी तन्हाई है
खुशी और गम दोनों से रुसवाई है
मस्त हूँ गम भुलाकर जीवन के
जीता हूँ पल बचे हुए अब आनंद के
जिंदगी की कहानी अब समझ में आई है
समझो तो अथाह सागर नहीं तो राई है
ये बहती धारा कब किसके हाथ आई है
समझ सके तो समझ ले यही सच्चाई है !!

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डी. के. निवातियाँ [email protected]

14 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 11/05/2016
    • निवातियाँ डी. के. 12/05/2016
  2. MANOJ KUMAR 11/05/2016
    • सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 11/05/2016
      • निवातियाँ डी. के. 12/05/2016
    • निवातियाँ डी. के. 12/05/2016
  3. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 11/05/2016
    • निवातियाँ डी. के. 12/05/2016
  4. आभा 11/05/2016
    • निवातियाँ डी. के. 12/05/2016
  5. sarvajit singh 12/05/2016
    • निवातियाँ डी. के. 12/05/2016
  6. babucm 12/05/2016
    • निवातियाँ डी. के. 12/05/2016

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