ईर्ष्या – शिशिर मधुकर

औरत को पुरुषों ने जब भी यथोचित सम्मान दिया
औरत की ईर्ष्या ने ही तो फिर उसका नुक्सान किया
सारी नारियाँ केवल यहाँ महिला उत्थान की बात करें
लेकिन अपनी क्षुद्र सोच का वो ना कभी परित्याग करें
यदि कोई महिला अपने सहकर्मी से सहयोग बढाती है
घर में पत्नियों की ना जाने क्यों भृकुटियाँ तन जाती हैं
हर बात में उनकी शक करने की जो प्राचीन बीमारी हैं
इसके आगे नतमस्तक होकर तो सारी दुनियाँ हारी है
बहन, बेटी और माँ के सिवा कोई रिश्ता इन्हे मंज़ूर नहीं
फिर भी तुमने हिम्मत की तो चंडी के दर्शन पाओ यहीं
पत्नी द्वारा परपुरूषों की तारीफ़ को तो सहना होगा
पतियों को परस्त्री को केवल अम्मा, बहना कहना होगा..

शिशिर मधुकर

10 Comments

  1. निवातियाँ डी. के. 06/05/2016
    • Shishir "Madhukar" 06/05/2016
  2. babucm 06/05/2016
    • Shishir "Madhukar" 06/05/2016
  3. sarvajit singh 06/05/2016
  4. Shishir "Madhukar" 06/05/2016
  5. MANOJ KUMAR 07/05/2016
  6. Shishir "Madhukar" 07/05/2016
  7. Anmol tiwari 07/05/2016
  8. Shishir "Madhukar" 07/05/2016

Leave a Reply to Shishir "Madhukar" Cancel reply