ज़रा सी है ये ज़िन्दगी…..

ज़रा सी है ये ज़िन्दगी…..

ज़रा सी है ये ज़िन्दगी
क्यों लेकर चलें साथ
शिकवे और शिकायतें
जो लम्हे खूबसूरत मिलें
वही निशानी , वही सौगात

ज़रा सी है ये ज़िन्दगी
क्यों मलें हम हाथ
उस पल के लिए जो
न था कभी मेरे पास
शायद नहीं था वो ख़ास

ज़रा सी है ये ज़िन्दगी
क्यों जियें कल में
जब आज दे रहा आवाज़
इसे कर दें बेहतरीन
क्यों रहें हम नाराज़

—— स्वाति नैथानी

4 Comments

  1. sarvajit singh 05/05/2016
  2. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 05/05/2016
  3. Shishir "Madhukar" 05/05/2016
  4. swati 05/05/2016

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