कुछ पंक्तियाँ

१) जम गए थे अश्क़ भी मेरे
पिघलने दे इन्हें जी भर के इन्हे
तेरी पलकों की गर्मी न जाने फिर कब मिले

२) रेशम भी अब भाता नहीं
एक खलिश सी जो बस गयी है करवटों में

३) सुकूं मिले जो तेरी इक झलक मिल जाए
इससे पहले कि ज़िंदगी और संगदिल हो जाए

४) मेरी शायरी बन गयी है आशियाँ उसका
अब तो लफ़्ज़ों के दरमियाँ ही होती है लुका छुपी

५) रफ्ता रफ्ता रिस रहा है ये दिल
देखना कहीं ज़लज़ला न आ जाए

६) अंधेरों से क्यों डरता है रे बन्दे
घने बादल ही लेकर आते हैं बूँदों की फुहार

७) जीने का मज़ा तो तब है
जब हम रूठे रहें
और तक़दीर मनाए हर बार

5 Comments

  1. sarvajit singh 05/05/2016
  2. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 05/05/2016
  3. Shishir "Madhukar" 05/05/2016
  4. babucm 05/05/2016
  5. swati 05/05/2016

Leave a Reply